अधूरी मोहब्बत की दास्तान
मिली थी राहों में इक दिन,
वो हँसीन चाँदनी सी।
बातें उसकी मीठी इतनी,
जैसे कोई चाशनी सी।
कह ना सका दिल की बातें,
सपनों में खोया रहा।
वो समझी दोस्ती मेरी,
मैं इश्क़ में डूबा रहा।
नज़रें मिलीं, मुस्कानें बिखरीं,
दिल ने चाहा था उसे।
पर फासले थे तक़दीर के,
बयान ना कर सका मैं किस्से।
कह ना सका दिल की बातें,
सपनों में खोया रहा।
वो समझी दोस्ती मेरी,
मैं इश्क़ में डूबा रहा।
फिर आई जुदाई की घड़ी,
राहें हमारी बिछड़ गईं।
वक़्त के इस खेल में,
कहानी अधूरी रह गई।
कह ना सका दिल की बातें,
सपनों में खोया रहा।
वो समझी दोस्ती मेरी,
मैं इश्क़ में डूबा रहा।
आज भी करता हूँ इंतज़ार,
ख़्वाबों में बसता है उसीका प्यार।
थी हक़ीकत या कोई अफ़साना,
बस यही जानने को है दिल दीवाना।
क्यों मिलता है दिल उसी से,
जिससे मिलना लिखा होता नहीं?
क्यों मिलकर भी किस्मत हमको,
मिलने देती कभी नहीं?
सब कुछ देकर भी क्यों खुदा,
एक ख्वाहिश अधूरी रखता है?
क्यों मोहब्बत की राहों में ,
वो सबसे बड़ा इम्तिहान रखता है?