तुम करो तो जज़्बात, हम करे तो खयालात
हम मुड़े तो राहगीर, आप खोए तो सवालात
मुस्कुराहट की कोई क़ीमत नहीं हे सुना था
आप लम्हों का भी अब रखते हो हिसाब
लकीरें भी हम मरोड़ देते गर आप थम जाते
रास्ता छोड़कर अंधेरे गलियारों में मुड़े आप
खुदा भी एक गुनाह की सजा दोहराता नहीं
अलग होते होते अब अकेले पड़ गए आप
संभाले बहुत बाग बगीचे हमने आपके लिए
लेकिन फूलों में से कांटे ही चुनते हैं आप
चलना दस्तूर हे और हम तो नसीब के मारे हैं
हाथ छुटने को रिश्तों की मौत समझते हो आप