"तू और मैं"
कहीं दूर किसी मोड़ पर,
जब हवा तेरा नाम ले आती है,
दिल यूँ ही बेख़बर सा हो जाता है,
आँखों में हल्की सी नमी आ जाती है।
मैं तुझे भूलना नहीं चाहता,
पर यादों की ये आदत नहीं जाती।
तेरी हँसी का इक टुकड़ा भी,
अब भी मेरी रूह में बसती है।
जब चाँद मुझसे गुफ़्तगू करता है,
तेरा अक्स उसमें दिख जाता है।
मैं हौले से उससे कह देता हूँ,
"तू उसे देखे तो मेरा सलाम कहना।"
मोहब्बत कोई लफ्ज़ नहीं,
जो बस यूँ ही कह दिया जाए।
ये वो एहसास है जो जीया जाता है,
हर धड़कन में, हर सांस में, हर दुआ में…
तू अगर अब भी कहीं सोचता होगा,
तो शायद ये बात समझ जाएगा,
कि इश्क़ को कहने की ज़रूरत नहीं,
बस महसूस करने की चाहत होती है…