ख़ामोश लफ़्ज़
कभी लफ्ज़ बोले, कभी चुप रहे,
हम तेरी यादों में डूबे रहे।
चाँद रोशनी में नहाता रहा,
हम अंधेरों में जलते रहे।
तेरी आँखों में जो ख़्वाब थे,
हम उन्हें सच समझते रहे।
तेरी राहों में बिछी थीं चिंगारियाँ,
हम फूलों की तरह चलते रहे।
वो वादा, वो कसमें, वो बातें सभी,
बस एक कहानी में ढलते रहे।
अब तन्हाइयाँ हैं, और ख़ामोशियाँ,
हम तेरा नाम फिर भी पढ़ते रहे।
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कैसी लगी ये नज़्म?