ख़्वाबों में जो देखा था, वो मंज़र नहीं मिला,
दिल को जो चाहिए था, वो हमसफ़र नहीं मिला।
चलते रहे तन्हा, सायों के साए में,
मगर उस चांदनी रात का असर नहीं मिला।
दिल के दरवाज़े पर हर दस्तक सुनी,
पर जिसको बुलाया था, वो ही हमसफ़र नहीं मिला।
...... Lokesh dangi