मन की परछाईं
जब सूरज डूबने को हो,
और मन चुपचाप बैठा हो,
तब भीतर उठती है एक पुकार,
जो सुन ले कोई, वही सच्चा यार।
छलके जब आंखों का पानी,
तब दिखती है मन की कहानी।
पर हर कहानी के पीछे है एक परछाईं,
जो साथ रहे, बस वही सच्चाई।
मैं ढूंढती हूं उस परछाईं को,
जो मेरे मन की आवाज बने।
जो मेरे हर दर्द को अपना कहे,
और मेरी हर चुप्पी को सुने!!
#shayri