आज तुम्हारी तस्वीर देखी,
तस्वीर देख कर करने को इतनी सारी बातें तो थी,
पूछने को इतने सारे सवाल तो थे,
लेकिन न जाने क्यों उस वक़्त कुछ याद ही नहीं आया!!
जब मैंने देखी तुम्हारी साड़ी में वो तसवीर,
तो मैं खो गया था उस तस्वीर में कहीं
शायद एक बच्चे की तरह, .
मन मचल गया था कि आज तुम समीप होती तो उस तस्वीर से मिलान करके तुम्हे निहारता !!
मैं ये भी तो बोल सकता था कि तुम जब हंसती हो तो तुम्हारी आंखें थोड़ी बंद हो जाती है और होंठ ज़रा से खुल जाते है। ऐसा बहुतों के साथ होता होगा,
पर उनको हंसते हुए इतने ध्यान से देखा नहीं कभी।
कभी गौर नही किया उनपे....
इतना सब कुछ था तुमसे पूछने के लिए फिर क्यू नहीं पूछा ..
शायद हर बार की तरह खो गया था उस तस्वीर में शायद मैं....फिर से!!!
🤘❤️