तेरे नाम से शुरू
तेरे नाम पर ख़तम
कुछ इस तरह से थे हमारे ज़ज्बात
बिना मिले किसी की इस कदर आदत हो जाना
वो मैंने तुमसे से मिल कर ही जाना
watsup पर chat
वो तेरे फ़ोन का इंतेज़ार
शायद यही मोहब्बत हैँ
हाला की तुम मेरे किस्मत में नहीं
पर मोहब्बत की कोई सीमा नहीं
लोग कहते हैँ अरे तुम बात नहीं करती
पर बातों के लिए इंसान का होना भी ज़रूरी हैँ
मैं चुप चाप अपने वक़्त का इंतेज़ार करती हूँ
कभी तो इंतेज़ार की घड़िया ख़तम होंगी
तेरे पास ना होकर भी
हर पल खुद को एहसास दिला जाती हूँ
याद हैँ मुझे तेरी पसंद
इसलिए आज भी वही रंग पहन कर
उसी जगह तेरे आने के इंतेज़ार में शाम गुज़र लेती हूँ
कम्बख्त ये ❤️दिल भी ना
मानता ही नहीं
- SARWAT FATMI