हिंदी दिवस पर एक गीत
हिंदी का स्वागत अभिनंदन....
भारत की आँखों का अंजन।
निर्मल भाषा कोमल कंचन।।
नमन कर रहा विश्व जगत अब।
हिंदी का स्वागत अभिनंदन।।
आजादी में बनी प्रणेता।
बुद्धि ज्ञान की है महाश्वेता।।
एक सूत्र में सबको बाँधा।
सहज सरल भावों की ध्येता।।
हाथ जोड़ करते हम वंदन...
संघर्षों का पल मुस्काया।
अमृतकाल वर्ष सुख आया।।
अर्थव्यवस्था अब हर्षाई।
विश्व जगत को भारत भाया।।
हिंदी हर दिल का स्पंदन....
हिंदी की यह गौरव गाथा ।
भाव भंगिमा की है दाता ।।
अभिव्यक्ति में सदा निपुण है।
परिचायक संस्कृति की माता।।
माथे अभी सजा है चंदन.....
हिंदी सहज सरल अभिलाषा।
तकनीकी विज्ञान की भाषा।।
कम्प्यूटर की बनी सहेली।
प्रगतिशील जन मन की स्वाँसा।।
हिंदुस्तान करे नीरांजन ....
संस्कृत की है बड़ी दुलारी।
शब्द कोष से झोली भारी।।
देव नागरी लिपि है इसकी।
जैसा लिखो पढ़ो बलिहारी।।
नहीं कभी शब्दों का क्रंदन.....
सत्य सनातन बोली इसकी।
भ्रम में कहीं नहीं है भटकी।।
जग को शून्य दिया भारत ने।
अंग्रेजी दिखती अब छुटकी।।
खेल रहीं भाषाएँ अंगन.....
बालमीकि, तुलसी यश अर्चन।
मीरा सूर कबीरा मंथन।।
गूँजी है घर-घर में वाणी।
सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक अर्जन।।
चंदन, वंदन, गिरजानंदन....
मनोजकुमार शुक्ल *मनोज*