**ख्वाबों की नगरी**
ख्वाबों की नगरी में चलो,
जहाँ हर सपना सजीव हो,
जहाँ आसमान का रंग सुनहरा,
और धरती का आँचल नीला हो।
जहाँ परिंदे गुनगुनाते गीत,
पेड़ भी नृत्य करते हों,
जहाँ हवाओं में मिठास बसी,
और बादल भी हंसते हों।
एक ऐसी दुनिया की तलाश,
जहाँ सबके दिल सच्चे हों,
जहाँ नफरत की कोई जगह न हो,
और रिश्ते जैसे कच्चे हों।
हर सुबह एक नई उम्मीद लाए,
हर शाम एक नयी कहानी कहे,
जहाँ हर दिल का सपना सजे,
और प्यार की धुनें बजें।
चलो, ऐसी नगरी में चलें,
जहाँ खुशियों का मेला लगे,
जहाँ हम सब मिलकर गाएं,
ज़िन्दगी के गीत सजे।