पुनर्जन्म' आपका उपन्यास भाव,भाषा,शैली,शिल्प,सन्देश और उद्देश्य की दृष्टि से अत्यंत श्लाघनीय है। इसकी कथावस्तु प्रेम एवं त्याग के उदात्त तत्त्वों पर आधारित है। इसमें रोचकता,जिज्ञासा,कौतूहल,समग्र प्रभाव और कसाव प्रारम्भ से अंत तक विद्यमान है। पात्र योजना विषय वस्तु के अनुरूप और नायक-नायिका प्रधान है। संवाद कथा की गति को आगे बढ़ाने वाले,चरित्र पर प्रकाश डालने वाले एवं मर्म को छूने वाले हैं। भाषा सरल,सुबोध,प्रांजल,प्रवाहमयी, पात्रानुकूल एवं भावानुकूल है। शैली- आत्मीय, सरस,रोचक एवं मुहावरेदार है। शीर्षक 'पुनर्जन्म'सर्वथा सार्थक एवं समीचीन है। नायिका वंदना के कथनानुसार- " मेरी कहानी की नायिका मैं स्वयं हूँ। आपको मझधार में छोड़ कर जाने वाली आपकी निशा और कोई नहीं थी। वंदना के रूप में निशा का यह पुनर्जन्म है।"(220)
नायक विजयेश चरित्रवान,खुशनशीब,भाग्यशालीऔर भगवान शिव की अनुकम्पा का देय है। द्रष्टव्य है- "मेरी वंदना.......मैं आज इस दुनिया का सबसे भाग्यशाली और खुशनशीब इंसान हूँ। नायिका निशा नायक के जीवन को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे देती है। लेखक ने वृद्ध दम्पत्ति पात्रों के माध्यम से संकट के समय निस्वार्थ भाव से मानव की सेवा करने का सन्देश दिया है।
अतः उपन्यास औपन्यासिक तत्त्वों के आधार पर प्रयोजन, अभिप्रेत,उद्देश्य एवं सन्देश की दृष्टि से भी प्रभविष्णु एवं मार्मिक है और देशकाल व परिस्थिति के अनुरूप है। पाठक इसे बहुत पसंद करेंगे। उत्कृष्ट सृजन के लिए लेखक बधाई के पात्र हैं। शुभकामनाओं सहित।
डॉ. ज्ञानप्रकाश पीयूष,
सिरसा(हरियाणा)
94145 37902.