गांव चला शहर की ओर
छोड़ प्रिय शांतिदायक ठौर
भूल कोयल की मीठी वाणी
सुनने लगा शहर का शोर।
एक भोला भाला लड़का
गया शहर, गांव से पढ़ने
लौटकर जब आया गांव
दादा जी बैठे थे आंगन में
हिप्पियों जैसी शक्ल देखकर
दादा जी ने अपनी भौहें चढ़ाई
सिर की चोटी गायब है बेटे
बोल कहां और क्यों कटवाई
कसम खाकर कहता हूं दादा जी
मैंने चोटी बिल्कुल नहीं कटवाई
ज्यादा लम्बे हो गए हैं बाल मेरे
इसलिए चोटी नहीं देती दिखाई
अब ओर क्या बोलूं बेटा
शहर जाकर गांव की शामत आई
हट्टे कट्टे गबरू गांव के
शहर जाकर बन गए मुन्ना भाई।