मैं और मेरे अह्सास
किसी खास के लिए रंगोली सजा रहा है कोई l
जरासी बात पे रूठे हुए को मना रहा है कोई ll
मिलना मिलाना इत्तफाक है शायद इसलिए l
चुपचाप खामोशी रिश्ते को निभा रहा है कोई ll
महफ़िल में जाम पर जाम पिये जा रहे हैं कि l
दिल जलाने के लिए तेवर दिखा रहा है कोई ll
२-८-२०२४
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह