***अभि सिसक़ते हुए जज़्बात*** ( ग़ज़ल )
बेचैन दिल की धड़कन, सिसकते हुए जज़्बात,
आँखों में समन्दर, अभि अश्क़ों की बरसात।
रात की तन्हाई में, ख़ामोशी की आवाज़,
दिल की गहराई में, एक अनकही साज़।
यादों की गलियों में, भटकते हैं अरमान,
बीते लम्हों का अक़्स, दिल में एक तूफ़ान।
व़क्त की पाबंदी, नफ़रत की सियाही,
टूटे हुए ख़्वाबों में, बसी है एक गवाही।
प्यार की वो क़सम, अधूरी-सी कहानी,
ख़ामोश रातों में, अभि बेदर्दी का पानी।
ख़्वाहिशों के धागों से उलझे हुए रिश्ते,
दिल की दरारों में, बिछड़े हुए वो क़िस्से।
अनकही बातें, अभि धुंधली सी यादें हैं
धड़कनों में बसती, प्यारी वो फ़रियादें हैं।
©- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'