वो बात निराली है , वो रात निराली है
जो मिली हमें तुमसे , हर सौग़ात निराली है
मोहब्बत में हुए चर्चे थे हज़ारों हैं
जो बन गए किस्से कि हर रात निराली है
शिक़वें थे हमें उनसे कि वो बात नही करते
ख़्वाबों में आकर फिर वो मुलाक़ात निराली है
दीवाने थे कि हम उन पर मरा करते थे
दिखाई जो हमें उनने वो औक़ात निराली है
क़ातिब तुझसे पूछ रही “हसरत” की कलम
कि वो शायरा दीवानी थी या उनकी हर बात निराली है....।
वो बात निराली है , वो रात निराली है
जो मिली हमें तुमसे , हर सौग़ात निराली है
by शिवांगी गुप्ता✍️