" धन के तीन मूल्य " (कविता)
धन के तीन मूल्य हैं, जो जानो तो अनमोल,
सच की राह पर चलो, यही जीवन का बोल।
पहला मूल्य है सत्य, जो देता है आधार,
धन से बढ़कर चमक है , ये सबसे महान।
दूसरा मूल्य है प्रेम, स्नेह और अपनापन,
धन से ज़्यादा क़ीमती, है दिल का आँगन।
तीसरा मूल्य है ज्ञान, जो करता हमें प्रखर,
धन से न मापा जाए, ये है सबसे अमर।
धन से न हो अहंकार, तुम समझो इसका सार,
मूल्यों की दौलत से बने,अभि जीवन का हार।
धन आता, धन जाता, दुनिया का दस्तूर,
मूल्यों की जो पूंजी है, बस वही सच्चा नूर।
जीवन की इन राहों में, अभि रखो ये सबक साथ,
धन से नहीं खरीदा जाता, मूल्यों का असली स्वाद।