तुम आदतें मत डाल देना,
जैसे पंछीओ को पिंजरों की लग जाती है,
जैसे बांध कुवे को लग जाती है,
तुम बांध मत जाना जैसे नदियां बांध जाती है,
चुप मत बैठना जैसे रात खामोश हो जाती है,
तुम्हे इन सब से विपरीत होना है,
क्यूंकि जो विपरीत नहीं हुआ,
वो कभी जी भी नहीं पाया.