**ग़ज़ल: हार नहीं मानना**
कभी हार नहीं मानना, ये ज़िन्दगी का सफ़र है,
मुश्किलों से जूझते रहना, ये हौसलों का असर है।
जो गिरते हैं, वही तो उठकर, बुलंदियों को छूते हैं,
रास्ते में काँटे ही सही, पर फूलों की भी डगर है।
हर अंधेरी रात के बाद, सुबह की एक नयी किरण है,
तूफ़ानों से लड़ते रहना, ये जीने का हुनर है।
आँखों में रख सपने, और दिल में अडिग विश्वास हो,
रुकावटें आती रहेंगी, पर तेरा हौसला अमर है।
हार नहीं मानना कभी, ये जीत का पहला कदम है,
सपनों को सच करना ही, तेरे जीवन का ज़हर है।
कदम-कदम पर मुश्किलें हों, तो घबराना नहीं कभी,
तेरे हर सवाल का जवाब, तेरे हौंसलों का ही घर है।