हमारी अधूरी प्रेम कहानी
मेरे दिल का दर्द आज कागज पर उतर आया है।
बदनसीबी तो जैसे बचपन से मेरा साया है।
जब पहली बार उसकी फोटो में दीदार हुआ।
मेरे दिल को पहली नजर में ही प्यार हुआ।
लगा जैसे सूने जीबन में बहार आ गयी।
जो खो गई थी मुस्कान फिर एक बार आ गयी।
मेरे लिए उसका रिश्ता जिस दिन आया था।
शादी उसी से करूँगा मैंने पक्का मन बनाया था।
जिस दिन मेरे उससे सामने से मुलाकात हुई।
पहली बार जब मेरी उससे बात हुई।
जितना सोचा था उससे भी खूबसूरत थी वो।
ऐसा लगता था कि सुंदरता की मूरत थी वो।
मैं उसके साथ सुनहरे जीवन के सपने देखा लगा था।
बहुत दिनों बाद मेरा सोया हुआ नसीब जगा था।
लेकिन मेरी खुशियाँ कुछ दिन की मेहमान था।
वो मुझसे जुदा हो गयी जिसमे मेरी जान बसती थी।
उसके घरवालों को ये रिश्ता मंजूर नहीं था।
लेकिन इसमें उसका कोई कसूर नही था।
वो भी मुझसे बहुत प्यार करती थी।
मुझे पता नहीं था की वो भी मुझपे मरती थी।
बिछड़ने की खबर से मेरी पूरी दुनिया उजड़ गयी।
पता नहीं कितनी रातें मेरी रो-रो कर गुजर गयी।
उसने मेरे लिए क्या कुछ नहीं किया।
घरवालों के ताने सुने अपना सब कुछ खो दिया।
मैं कायर था अपने प्यार के लिए कुछ न कर सका।
उसके एहसानों का बदला मैं कैसे चुका पाऊंगा।
जान भी दे दूँ उसके लिए फिर भी ना उबर पाऊंगा।
बस यही दूआ है उस रब से की उसे अच्छा हमसफ़र मिले।
उसकी हर ख्वाहिश पूरा करने वाला घर मिले।
आज भी उसकी याद में मेरी आँखें बरस जाती हैं।
बस एक बार उस देखने को ऑंखें तरस जाती हैं।
THE END