काफ़िर की चश्म-ए-नाज़, कयामत परभु की माया,
दिल को छोड़ दो, सब ईमान तक परभु की माया
इतमीनान हसरतों की बारिश, ख्यालों का है नशा,
दीगर काली घटा, ये जवानी तंग परभु की माया
उल्फत का आसरा है, आरज़ू का है जता सफ़र,
कश्ती भी, मझधार का है समुंदर परभु की माया
तौबा का ना कोई, ना ऐतबार-ए-इश्क कश्नुमाइश,
अरज चल उठे, वो इंतेहा-ए-इश्क परभु की माया
शाम-ए-फ़िराक़ का ग़म, कयामत से बढ़ कर है,
जिगर चक के फ़ासले का सफ़र परभु की माया।
उसकी हंसी की रोशनी, सहर रहबर की सुबह है,
जहां दिल की राह, कूपन खटाखट परभु की माया
------
सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहित
अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद अपने आप मन के भाव को जोडे-समस्या को कसौटी पर परखे, केवल चितंन योग्य, मय आंनन्द
© जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705
-------