जानती हूं अब कभी,
गुजरे हुए पल,
वापस नहीं आएंगे..
फिर क्यों लगता है,
तुम आवाज़ दोगे....
जानती हूं फिर कभी,
नहीं मुलाकात होगी,
फिर क्यों लगता है,
तुम इंतज़ार करोगे....
जानती हूं मेरे आंसू,
नहीं दिखेंगे तुम्हें,
फिर क्यों लगता है,
तुम पोंछ दोगे.…..
जानती हूं नहीं आएगा वो दौर,
फिर क्यों लगता है,
तुम मुझे याद करोगे,
जानती हूं अलग हो गए हैं रास्ते,
फिर भी क्या तुम मेरी तलाश करोगे.....??
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