Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

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मेरी उलझन
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आज मन इतना उदास क्यों है
इस उदासी का कारण क्या है?
बहुत सोचता हूँ कि इस स्थिति बाहर निकलूँ,
पर इसका मार्ग भी तो नहीं मिलता।
यूँ तो बहुत समझदार हूँ मैं
ये भी आप सब ही कहते हैं?
कहाँ गुम हो गई वो समझदारी
जो आज ढूंढ़े से नहीं मिलती।
लगता है कि मैं और उलझता जा रहा हूँ
उलझन का कारण भी समझ नहीं पा रहा हूँ,
इसलिए आप सबसे गुजारिश कर रहा हूँ
कोई तो समझाये मुझे, इसलिए फरियाद कर रहा हूँ।
अपनी समझदारी से लाचार हो रहा हूँ
अपनी ही उलझन खुद नहीं सुलझा पा रहा हूँ
हल पाने का इंतजार कर रहा हूँ।
कोई मुझे इस उलझन से उबार ले
समझदारी का मेरा तमगा भले ही वापस ले ले
जैसे भी हो मुझे मुश्किल से निकाल ले,
बस! इतना सा एहसान कर दे
चाहे तो आभार धन्यवाद अग्रिम ले ले,
पर जैसे भी हो मेरी उदासी का कोई हल दे दे।

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा उत्तर प्रदेश

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 111939861
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