लफज-ए-अदब में बस उनका नशा था,
हुस्न ए दरबार हया ए फुन्न खुमार था।
जुल्फ-ए-परीशां का जो जादू था,
वो शब के अँधेरों हजार बार था
दिल-ए-बेकारार की जो हालात थी,
वो सिर्फ़ उनकी याद,
हर तारूफ में बस उनका ज़िक्र था,
गर रूसवा हजार बार था
गुलशन-ए-शब की वो रौशनी थी,
उनकी निगाह में जो असर था,
खामोशी में भी, मेरा दर्द चुप था,
शहर ए जमघट हजार बार था।
निगाह-ए-जादू में उनका साया था,
हर पल में बस उनका पाया,
लफ़्ज़-ए-शब में एक नशा था,
दिल को बहला हजार बार था ।
कहानी-ए-इश्क में जो नशा था,
वो उनकी अदाओं का असर था,
हर लम्हा में बस उनकी बात थी,
सरकारी नजराना हजार बार था ।
उनकी मुस्कुराहट का एक जादू था,
हर सांस में बस उनका नशा,
निगाह-ए-मस्त में जो असर था,
जाम-ए-गुल हजार बार था।
निगाह-ए-शब में जो चमक थी,
वो उनके हुस्न का जलाल था,
लफ़्ज़-ए-मोहब्बत में बस उनका ज़िक्र था,
क्या यही सवाल हजार बार था।
महफिल-ए-चिराग़ान अजब ग़रीब थी,
जब उनकी आई थी याद,
ईश्क-ए-नाफरमानहा उनका नाम था,
या रब्ब कुंतो हजार बार था ।
महफिल-ए-मुशायराह उनकी,
खामोशी में भी, था एक पैगाम,
लफ़्ज़-ए-शाहजहॉं में जो असर था,
तो मैययार हजार बार था।
दिल-ए-बेकारार का जो दर्द था,
वो उनकी याद में था बस,
निगाह-ए-शरमोहया में जो असर था,
दिखाया हजार बार था ।
सुबहो शाम को उनकी याद आई,
हर पल में बस उनकी थी याद,
खवाब-ए-जिंदगानी में जो असर था,
ब्हरहाल सजा हजार बार था ।
निगाह-ए-परसतिस का असर,
रह रह कर नशा क्यु था दिया,
उनके हुस्न-ए-जमाल में जो चमक थी,
जलाल हजार बार था।
हर पलयाद आई उनकी,
हया-ए-शफाकार में जो था असर,
मुझे गिला क्यु है लफज-ए-जिल्लत,
बचाया हजार बार था ।
ग़म को भी उन्होंने सुकून दिया था,
मुस्कुराहट का था जादू,
हर याद में लफज-ए-खाक,
हया-ए-फितरत हजार बार था ।
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सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहित
अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद अपने आप मन के भाव को जोडे-समस्या को कसौटी पर परखे, केवल चितंन योग्य, मय आंनन्द
© जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705