कभी तो आएंगे,
वो पास मेरे,
दिल के अरमान,
फिर से सास मेरे।
शायरी और अशार का हुस्न, उनवान से है,
जिसे देखा तो रूह महल मेरे, ये आतिश मेरे ।
जजबात निगाह-ए-जादू, दिल का दर्द है,
आरास्ता-सफ़र-ओ-दार-ओ-दीवार खास मेरे ।
जाम ए मस्ती जाने कितनी रातों का राज है,
मुलाक़ात हिज्र-ए-नियाज़ हनास मेरे ।
गुलिस्तां-ए-इश्क में, हर कली फ़रामोश है,
उस निगाह-ए-हुस्न का, जो ख़ुमार मेरे ।
लब-ओ-लहजा में, हुस्न-ए-बयां है,
दिल की राहों में, लफज ए अरमान मेरे।
वो शबनम-ए-शब, वो रंग-ए-महताब,
खुशबू लफ़्ज़-ए-तकदीर का जवाब मेरे ।
बयान करू कैसे, दिल की बात रंग ए हया,
हर शब में, बस उनका ही सूरत सवाल मेरे
जहाँ-ए-इश्क़ में, सिर्फ़ उनका है जलवा,
तसव्वुर का सिलसिला, महफिल-ए-मजाक मेरे
मेरी दास्तान-ए-इश्क, उनका ही किस्सा,
हर आरज़ू में, उनका ही ख़्वाब-ए-ख़याल मेरे।
कभी तो आएंगे, ख़्वाब-ए-तबस्सुम वो पास मेरे,
हया ए तकाजा, लफ़्ज़-ए-ख़ज़िन फिर सांस मेरे।
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सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहित
अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद अपने आप मन के भाव को जोडे-समस्या को कसौटी पर परखे, केवल चितंन योग्य, मय आंनन्द
जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705