एक लड़की है, जो भोलेनाथ से हर एक बात कहती है..
एक लड़की है, जो भोलेनाथ से हर एक बात कहती है..
वो कभी हवाओ से बाते करती है, तो कभी आसमानो से शर्त लगाती है..
कभी अकेले होने के तानों से उन्हे कस्ती है,
तो कभी काम बिगड़ जाने पर उन्ही से पूरा करने की आस लगा लेती है..
एक लड़की है, जो भोलेनाथ से हर एक बात कहती है..
वो बहता दरिया नही, बल्कि खुद को लहर मानती है..
शक्ल है मासूम, पर आंखो से हुकुम चलाती है।
एक लड़की है, जो भोलेनाथ से हर एक बात कहती है..
राहें मुश्किल हो तो बस मुस्कुरा देती है,
कभी कभी आंसू भी टपका देती है।
कमजोर कह लो या डरपोक,
खुद सह ले, पर खुद की वजह से किसी को दुखी नही देख पाती है..
एक लड़की है, जो भोलेनाथ से हर एक बात कहती है..
"मैं" नही "हम" करके खुद को दर्शाती है,
रिश्ते पूरे दिल से वो निभाती है।
खुद से पहले दूसरो का खयाल रखती है..
एक लड़की है, जो भोलेनाथ से हर एक बात कहती है...
एक लड़की है, जो भोलेनाथ से.. हर एक बात कहती है।
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ये कविता मेरी एक नोवेल के एक character पर based है.. आप लोगो को वो कहानी बेहद पसंद आएगी । कहानी का नाम है "अजनबी सा ये रिश्ता" जो आपको मातृभारती पर मिल जाएगी । जरूर पढ़िएगा ।