देख इश्क की राहों में हर जख्म का निशान है,
मुझको दिल में दर्द है, आफसार ए जिशान है।
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ढूढता ताउम्र शब-ए-तन्हाई में चाँद का हुस्न है,
रात का साया, पर सुबह का इंतज़ार, है मुझको।
हरपल दिल-ए-नादान को समझने वाला कौन है,
अश्क हैं आँखों में, पर मुस्कुराहट रजा है मुझको।
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इस और फिज़ाओं में गूंजती है दर्द की आहट है,
पता दर्द है दिल में, पर पतझड़ जचा है मुझको।
चिराग-ए-शाम से रोशन है यह राह भी है
शाम है तन्हा, पर रोशनी का असर है मुझको ।
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अफसा नगमा-ए-दिल में जज़्बात का रंग है,
नगमा है प्यारा, पर दर्द की सजा दी है मुझको।
यु तो मुझे जज़्बा-ए-दिल में इक जुनून है,
दिल है, पगला है, बहर ए हाल है मुझको।
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बता सही से हर ख्वाब में एक हकीकत छुपी है,
ख्वाब है रंगीन, पर सच्चाई यहॉं है मुझको।
यही आरज़ू-ए-दिल को खोना नहीं चाहिए,
आरज़ू गहरी, पर असर का गुलशन है मुझको।
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ज़ख्म-ए-मोहब्बत में सुकून का राज है,
ज़ख्म हरा, पर मरहम का समा है मुझको।
सन्नाटा है दिल में, पर आवाज़ का इंतज़ार है,
दिल है खामोश, पर सदा का इंतज़ार है मुझको।
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वो जो हर राह में एक मंजिल की तलाश है,
राह है मुश्किल, पर मंजिल का असर है मुझको।
क्या गुलशन-ए-इश्क में खुशबू का असर है,मुझको
बस गुल है प्यारा, पर खुशबू ए वहम है मुझको।
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सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहित
अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद अपने आप मन के भाव को जोडे-समस्या को कसौटी पर परखे, केवल चितंन योग्य, मय आंनन्द
जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705