અજાણ્યો પત્ર -14
कौन कहता है की दर्द बांटने से कम होता है? सब जूठी बाते है, फरेब है! दर्द शब्द सुनते ही सब बहरे हो जाते है ! जैसे ये पत्र को पढ़ते वक्त तुम अनसुना कर दोगी, तुम नहीं कह सकोगी की मैं सिर्फ तुम्हारी ही हूं! छोड़ दो ऐसी बातें लिखना ! मैं अब और नहीं पढ़ सकती! नहीं देख सकती तुम्हारा आंखों से गिरते आंसू! लेकिन तुम नहीं कहोगी क्योंकि दर्द बांटने से कभी दर्द कम नहीं होता!