बात कुछ भी नहीं फिर भी अजीब सी चाहत है
खामोशी में डूबे हुए हैं ख्याल,
बात कुछ भी नहीं फिर भी अजीब सी चाहत है।
दिल बेचैन है, मन उदास है,
जैसे कोई खोई हुई आस है।
आँखों में है तन्हाई की छाया,
फिर भी होठों पर मुस्कान का स्वांग रचाया।
दुनिया की रौनक बेकार लगती है,
बस एक तेरी ही तस्वीर प्यारी लगती है।