अब बेमतलब बातें करना
गाना गाना छोड़ दिया
अब मैं दफ्तर जाती हुं
छत पर जाना छोड़ दिया
दो चार जो यार होते थे
जो साथ में हंसते थे रोते थे
ना जाने कैसे होंगे वे
उनसे बतियाना छोड़ दिया
घंटों बैठ कर चाय पीना
बिस्कुट मन से खाना छोड़ दिया
ना जाने क्या क्या सोचती थी
पर अब फिजूल बातें सोचना छोड़ दिया
अब और किसी को कुछ नहीं कहती
पहले जैसें कहती थी
पर अब बातें करना छोड़ दिया
पहले रो देती थी कोई कुछ भी कहे
पर अब रोना धोना छोड़ दिया
इन्तजार कर कर के खड़ी रहती थी
पर अब वो इन्तजार करना छोड़ दिया।