होता है हर इंसान का किरदार पानी जैसा
लेकिन लोग कर देते है अनजाने में बुरे कर्म
तो बदल जाता है वो किरदार एक कीचड़ जैसा!!
पानी भी बदलता अपना किरदार वैसा
पर कीचड़ से बचने के लिए हो जाता दाग जैसा
तो बदल जाता है वो किरदार लोगों के नजरिए में जहर जैसा!!
ना बुरा होता ना अच्छा होता किरदार लोगों के नजरिए जैसा
बस अपने दिल से लोगों को खुशियां देने में हो जाता वैसा
तो बदल जाता किरदार एक शांत होने से लेकर प्रलय जैसा
हर वक्त होता किरदार उलझनों जैसा
ना मिले हल तो हो जाता उलझनों के पेड़ जैसा
तो बदल जाता है वो किरदार एक पुरानी गुफा के खंडहर जैसा!!
किरदार होता है हवाओं जैसा
बस कोई कैद ना कर पाए तांत्रिक ऐसा
तो बदल जाता है वो किरदार भी आसामनो में दिखने वाले बादल जैसा
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