#Beauty
मैं और मेरे अह्सास
मौसम की पहली बारिश ने दिवाना बना दिया हैं l
निगोड़े दिल ए नादां को और भी बेताब किया हैं ll
दिन गुज़रते जाते हैं एक के बाद एक इंतजार में l
सखी तौफिक की डोर से चाक जिगर को सिया हैं ll
आज चांद रात सितारों की मौजूदगी में ख्यालों में l
छत पे हुस्न की जुल्फों की खुशबु का जाम पिया हैं ll
भीगी मिट्टी की खुशबु से साँसें बहलने लगी हैं l
तपिश में राहत की साँस लेके अब चैन लिया हैं ll
प्रतीक्षारत आँखों का शुक्रगुज़ार हूँ जो साथ दे रही l
जीतना भी जीया है बस यादों के सहारे जिया हैं ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह