मंज़िल भी है, रास्ता भी है,
पर हाथ में हाथ देकर चलने वाला साथी नहीं है।
ख्वाब भी है, उम्मीदें भी हैं,
पर उनको साकार करने वाला हमसफ़र नहीं है।
धूप भी है, छाँव भी है,
पर साये में चलने वाला कोई नहीं है।
दिल की बातें कहने को बहुत कुछ है,
पर सुनने वाला कोई नहीं है।
जीवन की राह में अकेले ही चलना है,
कोई नहीं जो साथ निभाए, बस यूं ही सफर तय करना है।
मंज़िल भी है, रास्ता भी है,
पर हाथ में हाथ देकर चलने वाला साथी नहीं है।