जब कलम थम जाएगी
जब कलम थम जाएगी, स्याही सूख जाएगी,
कहानियां अनकही, ख्वाहिशें दब जाएगी।
शब्दों का संगीत, खामोशी में बदल जाएगा,
कल्पनाओं की उड़ान, धरती पर उतर जाएगी।
पन्नों पर लिखे सपने, धुंधले पड़ जाएंगे,
यादों की कलम से, आंसू बह जाएंगे।
दिलों का रिश्ता, धागे से टूट जाएगा,
प्रेम की कहानी, अधूरी रह जाएगी।
इतिहास के पन्ने, खाली हो जाएंगे,
वीरों की गाथाएं, भुला दी जाएंगी।
ज्ञान का प्रकाश, धीमी-धीमी मंद पड़ जाएगा,
अंधेरे में डूबी दुनिया, डर से कांप जाएगी।
लेकिन डरिए मत मेरे दोस्त,
कभी नहीं थमेगी कलम,
कभी नहीं सूखेगी स्याही,
कभी नहीं खत्म होंगे शब्द।
नई पीढ़ी आएगी, नई कलम उठाएगी,
नई कहानियां लिखेगी, नए सपने सजाएगी।
ज्ञान का प्रकाश फैलाएगी,
दुनिया को रोशन करेगी।
तो डरिए मत मेरे दोस्त,
कभी नहीं मरेगी कलम,
कभी नहीं मरेगा शब्दों का जादू।