कौन कहता है कि कुछ नहीं दरमियाँ तेरे मेरे...
वो एहसासों का हुजूम
वो जज़्बातों का सैलाब
वो अनकही बातें
वो अनछुए अरमां
बिखरी सी ख्वाहिशें
फैले से ख्वाब
वो सुकूँ के बिछे गलीचे
वो ख्यालातों के बगीचे
वो महकती हुई साँसें
उम्मीदों की मुस्कान
कौन कहता है कि कुछ नहीं दरमियाँ तेरे मेरे...!!