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मैं और मेरे अह्सास
किसकी आहट सुनी के दिल धड़क रहा हैं l
दौड़ के गले से लिपट ने को मचल रहा हैं ll
जुदाई में हर एक पल युग सा लगता है l
प्यार भरी बातें करने को तड़प रहा हैं ll
साँस जी को आ रही है अब तो जानेजा l
बस एक लम्हा देखने को तरस रहा हैं ll
ज़ाम पर जाम छलक रहे सुराही से देख l
महफिल में संग दोस्तों के बहक रहा हैं ll
सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह