आज उनसे पता पूछा तो,
उन्होने तारीफ़ के फूल बरसा दिए।
लफ्ज़ों की महक से महक गया मन,
सपनों में रंगीन गुलाल सा बिखरा दिए।
उनकी मुस्कान में था जादू बसा,
हर बात में थी मिठास की छवि।
जैसे बारिश की बूँदें तपते धरा पर,
वैसे ही उनके शब्दों ने दिल में ठंडक दी।
हर तारीफ़ में झलकती थी सच्चाई,
उनकी नज़रों में बसी थी प्यारी बात।
हर पंखुड़ी में छुपी थी एक कहानी,
उनके हर बोल में बसी थी सौगात।
पता पूछने का बहाना था सच्चा,
पर तारीफ़ों की बारिश ने भिगो दिया।
उनकी आवाज़ में जो प्यार बसा था,
उसने दिल को बेइंतेहा छू लिया।
आज उनसे पता पूछा तो,
उन्होने तारीफ़ के फूल बरसा दिए।
खिलखिलाते हृदय के हर कोने में,
उम्मीदों के चिराग़ जला दिए।