लोग डरते है और संभलते है जरिया बेवफ़ाईया का देखकर,
इतने डर कर भी कैसे जीते है अपने प्यार मे पागलपन सह कर,
जुगनु क्या, रात क्या, चाँद क्या, रोशन हुए हर सफ़र तुम्हे देखकर,
नींदों मे भी ख्वाब बने रोशनी के आओ जरा पूछो जलने वाले जलते है मुझे देखकर,
मौड जो आते है जवानी के फिसल ने के बेरुखे वक़्त पर,
ये आशियाँ भी मौत का कैसे चारो और घूमता है आशिकि के दौर पर ।
DEAR ZINDAGI 🙏