कूंच लोग आज भी नारी को कोठे पे नाचने वाली नारी समझते
हैं अगर नहीं समझते तो डायरेक्टर हिरामंडी जैसी फिल्म नहीं
बनाते और उससे गंदी सोच फिल्म देखने वालों कि है उसमें से
कूच लोग आज भी ऐसी ही फिल्म पसंद करते हैं और साबित
करना चाहते हैं कि आम नारी की असली जगह यही है ।।
नरेन्द्र परमार ✍️