लक्ष्य न ओझल होने पाए, कदम मिलाकर चल।
मंजिल तेरे पग चूमेगी, आज नहीं तो कल॥
सबकी दौलत, सबकी मेहनत, सबकी हिम्मत एक।
सबकी ताकत, सबकी इज्ज़त, सबकी किस्मत एक।
शूल बिछे अगणित राहों में, राह बनाता चल॥
छोड़ दे नैया अरे खेवैया, मझधार तुम्हारा डेरा।
खून-पसीना बहा के अपना, ला फिर नया सवेरा...
सीमाओं पर आज मचलता, देशभक्ति का बल॥
नूतन वेदी बलिदानों की, मांगे आज जवानी।
देनी ही हम सबको होगी, देश हेतु कुर्बानी...
बलिदानों का ढेर लगे, इतिहास बनाता चल॥
लक्ष्य न ओझल होने पाए, कदम मिलाकर चल ।
मंजिल तेरे पग चूमेगी, आज नहीं तो कल॥ - ©️ जतिन त्यागी