बहुत देर से है जनाब मोहबत सोहबत के जुठ से
साजन की आवाज सुबह सुबह है बस ये जहूर से
अंदाज ए गुफतगू का निराला है ग्या से सहूर से
बदले है मय खाने के ये अराकिन, लठ बंदूक से
जिन्दगी की मालूमात, अदांज, सियासत बटूक के
जाहिराना, कायराना तराजू ये अल्फाज संदूक से
आप जिन्दा है, तो फिर जिन्दा होने के सबूत दिजिये
मयखाने, नगारे, डकारे, बस वादे के जूत लिजिये
अययार शंकर मनी, को तोहमत बरदास्त हाजी
शहर कुफरे यार, सबूते गोंआ, दखल साबासी