सांसें रुक जाएगी क्या तब आओगे
दिल धड़कना छोड़ देंगी क्या तब आओगे
इतना भी बेताबी ना बढ़ाओ की चैन खो जाएं
इतना भी मत सताओ कि मौत आ जाए
कैसे जिएंगे हम तुम्हारे बिना
कटता नहीं ये पल तुम्हारे बिना
धड़कनों को और न बढ़ाओ तुम
बेचैनी को और न बढ़ाओ
ये घड़ियां कहीं रुक सी गई हैं
ये पल भी कहीं खो सी गई हैं
अब तो आ जाओ कि आग सी लग जाएं
मेरी दिल की प्यास भी बुझ सी जाएं
एक बार आवाज देते तो सही
मैं तो उस गली में खड़ी थी
एक बार मुड़ कर देखे तो सही
मैं वहीं खड़ी थी
कैसे भूल गए उन यादों को
जो हम साथ साथ बिताए थे
कैसे भूल गए उन वादों को
जो हम साथ साथ किए थे
क्या सोचा कि मैं भूल जाऊंगी
उन बीते पलों को मैं भूल पाऊंगी
देखो मेरी उन यादों को ना छीनो
जो अब बस मेरा है मेरा है मेरा है।
शुभ संध्या मित्रों।