जीवन के उस मोड़ पर हूँ जहाँ खुशियाँ मर चुकी है। हर पल ये सोचता हुआ बिताता हूँ कि अगले पल सब ठीक हो जाएगा। आजतक कभी भी कुछ भी सही नहीं हुआ। जो मैं चाहता हूँ वो मुझे कभी नहीं मिला और कुछ मिला भी तो अधिक देर रहा नहीं। भीतर ही अपने भावनाओं को दबाए एक घुटन भरी जीवन काट रहा हूँ।