सब कुछ एक साथ बिखरता हुआ नज़र आता है। सब कुछ भावनात्मक है, वास्तविक कुछ भी नहीं है, फिर भी भीतर ही भीतर मन कौंध रहा है। चिल्ला रहा है और काँप रहा है। एक टीस उतपन्न कर रहा है। किसी के होने और उसके जाने के बीच का पल बेहद नाजुक, भयानक तथा रौद्र होता है। आंसुओं को थामे लिख रहा हूँ।