मां दुर्गा तेरे दसो रूप है अनुपम....
प्रथम रूप में आके तु मां काली बनी।
बुराई का काल (समय) करने हेतु मां काली रूप में आई।
मां दुर्गा तेरे दसो रूप......
दूसरे रूप में आके तु मां तारा बनी।
भक्तों को सभी दुखो से तारने हेतु मां तारा रूप में आई।
मां दुर्गा तेरे दसो रूप......
तीसरे रूप में आके तु मां छिन्नमस्ता बनी।
सब चिंता का हल करने हेतु मां छिन्नमस्ता रूप में आई।
(चितपूर्णी)
मां दुर्गा तेरे दसो रूप......
चौथे रूप में आके तु मां षोडशी बनी।
वर देने में तत्पर रहनेवाली पंच मुखी मां षोडशी रूप में आई।
मां दुर्गा तेरे दसो रूप......
पंचमी रूप में आके तु मां भुवनेश्वरी बनी।
भक्तों को ऐश्वर्य प्रदान करने हेतु मां भुवनेश्वरी रूप में आई।
मां दुर्गा तेरे दसो रूप......
छठे रूप में आके तु मां भैरवी बनी।
मानवी को विद्या प्राप्त कराने हेतु मां भैरवी रूप में आई।
मां दुर्गा तेरे दसो रूप......
सातवे रूप में आके तु मां धूमावती बनी।
दुख सभी को होते है ये बताने हेतु मां धूमावती रूप में आई।
मां दुर्गा तेरे दसो रूप......
आठवें रूप में आके तु मां बगलामुखी बनी।
शत्रुओं का विनाश करने हेतु से मां बगलामुखी रूप में आई।
मां दुर्गा तेरे दसो रूप......
नवमे रूप में आके तु मां मातंगी बनी।
सबको अपने वश में करने हेतु से मां मातंगी रूप में आई।
मां दुर्गा तेरे दसो रूप......
दसवें रूप में आके तु मां कमला बनी।
गरीबी,संकट,अशांति दूर करने हेतु मां कमला रूप में आई।
मां दुर्गा तेरे दसो रूप है अनुपम....
🙏🙏🙏 "Rup"