मेरे अंग अंग करते हैं मुझसे कई सवाल...
आंखे पूछती हैं मैं कब बिन पानी रह पाऊंगी।
मन रोज पूछता मैं कब आराम से सो पाऊंगा।
मेरे अंग अंग करते हैं मुझसे कई सवाल...
शरीर पूछता हैं कब मैं चैन की सास ले पाऊंगा।
आत्मा पूछे कब मैं नए देह को धारण कर पाऊंगी।
मेरे अंग अंग करते हैं मुझसे कई सवाल...
होठ भी पूछते है कब मैं तेरे चहेरे पे खिल पाऊंगा।
अंदर से हदय पूछता प्रभु तेरे में कब समा पाऊंगा।
🙏🙏🙏 "Rup"