आँखे मिली तो होश खों बैठे -बया करे इश्क़ उससे पहले फनाह हो बैठे,
हाजिर हैं इश्क़ की किताब लब्ज पर आते आते अल्फाज कहीं गवा बैठे,
ये इश्क़ का दस्तूर भी कितना मदहोश हैं ये जान लीजिये- जान -को हथेली रखकर,
आँसा नहीं समुंदर मे डुबकर किताबों मे आग का किस्सा लिखना ए -सनम आशिक के दर्जे का काम है ।
DEAR ZINDAGI🙏