जीने की उम्मीद मे हार जाना ये उल्फत ए दिल पर इन्जाम् आता है,
दिल का आशिक का कसूर क्या क्या करता हैं, कहा जान पाता हैं!
दिल के मरीज ए इश्क़ मे महबूब को रुलाने का महोब्बत की तो आश काम आती हैं,
कत्ल का हिस्सा तो कातिलो मै डालिए वफ़ाई से बेवफाई करना बेवफ़ा को तो इन्जाम् आता है,
खामोश रहना मेरे खुदा से सिखा- जान ए -जिगर इम्तिहां तो प्रेम को परखने का काम है,
साथ जीने की लिए जख्म छबी से उतारे यही तो कलम ए स्याही से प्रेम शब्द दोहराने का काम है।
DEAR ZINDAGI 🙏