"कविता"
मैंने सावन से कहा दिल की आग बुझा!
सावन ने मुझसे कहा चुपके से जल जा!!
मैं बदल से कहा दिल की आग बुझा,
बादल ने कहा पागल है तू क्या !
मुझे पीने का शौक नहीं ,
यह दिल की लगी बुझानी है !
मैंने सागर से कहा मेरी प्यास बुझा !!
सागर ने कहा चल डूब के मर जा!
जिस रोज दिल ये टूटा था !!
उसे रोज बड़े जोर से बरसात हुई !
मैंने उससे पूछा मेरी क्या है खाता!!
...brijeshk ...