वो लोग कहाँ जहा याद आती रहे रात भर,
आँखो मै से आँसु की नदिया बहे रात भर,
गम बैठा रहा दबोकर हर दर्द को चस्मे मे मुस्कराता रहा,
आईना थर्थराता रहा छबि को देख_ रूह से निकलती आग तक,
आवाज ए परिंदे की छु रही बंसी की सुनहरी आवाज ले कर,
सुहानी चांदनी जगमगाती रही _ खुशियाँ दिल मे उतारती रही हर ख़्वाब पर,
दिवाना आशिक बन कर गुमता रहा महफ़िलो मे उसकी गलियों मे,
महबूबा को देखता रहा ख़्वाब बुंदता रहा , उसको देख जीने की उम्मीद मे जगता रहा रात भर ।
DEAR ZINDAGI🙏