तुमसे मिलना सही था या ग़लत
मैं नहीं जानती।
बस इतना जानती हूं।
तुम वो इन्सान हो
जिस पर मैंने दिल ही नहीं हारी।
खुद को भी हार आईं।
मिलना तो दूर अब मन ही नही है
तुम्हें जीभर कर देखूं।
जानती हूं कि तुम्हें गुरूर है बहुत अपने प्यार पर।
मैं नहीं जानती।
बस इतना जानती हूं।
तुम वो इन्सान हो
जिस पर ये जान भी दे दूं।